Diseases in Dairy Animals

Hemorrhagic Septicemia Disease in Cattle | Symptoms | Prevention | Treatment

डेयरी पशुओं में होने वाले प्रमुख रोग एवं उनके उपचार

गलाघोंटू रोग | Hemorrhagic Septicemia Disease its Prevention and Treatment

गलाघोंटू रोग जिसे Hemorrhagic Septicemia Disease, घुरखा, घोंटुआ, असड़िया, डकहा आदि नामों से भी जाना जाता है गाय एवं भैंस में होने वाला प्रमुख रोग है|

यह रोग मुख्य रूप से मानसून से समय फैलता है| “पास्चुरेला मल्टोसीडा” नामक बैक्टीरिया से होने वाला यह रोग बहोत खतरनाक है| इस रोग की मृत्युदर 80 फीसद से अधिक है| यह संक्रामक रोग प्रभावित पशु से स्वस्थ पशुओं में दूषित चारे, लार या स्वांस द्वारा फैलता है|

यह भी जानें: ब्लैक क्वार्टर (BQ) रोग, उसके लक्षण और उपचार 

गलाघोंटू रोग  के लक्षण | Symptoms of Hemorrhagic Septicemia Disease 

  1. इस रोग में पशु को अचानक तेज़ बुखार हो जाता है और पशु कांपने लगता है|
  2. पशु को साँस लेने में तकलीफ होने लगती है व मुंह से ढेर सारा लार निकलने लगता है| और नाक से स्राव भी बहने लगता है|
  3. गर्दन में सूजन आ जाती है जिस कारण सांस लेने के दौरान घर्र-घर्र की आवाज आती है और सांस लेने में तकलीफ होने लगती है|
  4. पशु की आँखे लाल हो जाती है, पशु चारा चरना बंद कर देता है और वह उदास रहने लागता है, जिस कारण वह सुस्त हो जाता है|
  5. पशु के पेट में दर्द होने लगा है और वह जमीं पर गिर जाता है|

यह रोग इतना खतरनाक है की इस रोग से पीड़ित पशु की 12-24 घंटे हैं मृत्यु होने ही बहोत अधिक संभावना रहती है|

गलाघोंटू रोग के उपचार |Treatment of Hemorrhagic Septicemia Disease 

यदि पशुचिकित्सक समय पर उपचार शुरू कर दें ओ इस जानलेवा रोग से पशु को बचाया जा सकता है| साल्फाडीमीडीन, ओक्सीटेट्रासाईक्लीन एवं क्लोरम फेनीकोल जैसे एंटी बायोटिक इस रोग में खिलाफ कारगर हैं जो पशुचिकित्सक द्वारा दी जाती है|

गलाघोंटू रोग में बचाव ही सबसे सर्वोत्तम कदम है|

गलाघोंटू रोग से कैसे करें बचाव | Prevention of  Hemorrhagic Septicemia Disease 

  1. पशुओं को हर वर्ष इस रोग का टीका लगवाना चाहिए|
  2. बीमार पशुओं को स्वस्थ पशुओं से अलग रखना चाहिए |
  3. जिस स्थान पर पीड़ित पशु बंधा हो उसे कीटाणुनाशक दवाईयों फीनायल और चूने के घोल से धोना चाहिए |
  4. पशु आवास को स्वच्छ रखें तथा रोग की संभावना होने पर तुरंत पशुचिकित्सक से संपर्क करें|

नीचे दिया गया विडियो जरुर देखें, विडियो देखकर ही आप इसके बारे में अच्छे से समझ पाएंगे
Image Source:

www.exportersindia.com

http://en.mercopress.com

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *